होम

आलेख

 

NEP में त्रि-स्तरीय भाषा का स्वागत है, लेकिन…

  केमेरी पांच वर्षीय बेटी गांव के एक निजी कान्वेंट में अपर किंडर गार्डन (यूकेजी) की छात्रा है। लॉकडाउन के

 

“धीरे-धीरे हरवा चलइहे हरवहवा, गिरहत मिलले..!”

अदरा चढ़े दो दिन हो गया था। देर रात से ही तेज बारिश हो रही थी। तीन बजे भोर में

ज़िंदगी लाइव

 

प्लीज, शहरी जिंदगी में गंवारपन को मरने मत दीजिए!

  ‘ए घरी के मेहरारू आवत बाड़ी स, मत पूछीं। सभके उहे हाल बा, ले लुगरी आ चल डुमरी’, रमेसर काका

 

डियर सुशांत, सहानुभूति तुमसे नहीं, बिहारी कलाकारों की बदक़िस्मती से है

प्रिय सुशांत, नमस्ते अलविदा! मुझे पता है, यह चिट्ठी तुम तक नहीं पहुंच पाएगी। फिर भी लिख रहा हूं, बिना

 

गाते, बजाते या संगीत सृजन करते समय, आप दुनिया का सबसे खूबसूरत इंसान होते हैं!

चुरा लिया है तुमने जो दिल को..! दम मारो दम मिट जाए गम फिर बोलो सुबह शाम…! नीले नीले अंबर

 

वो जेठ की तपती दुपहरी, नहर में डुबकी लगाना और गाछी का आम तोड़कर खाना!

जंगल जंगल बात चली है पता चला है, चड्डी पहन के फूल खिला है..! वर्ष 1990 का दशक, यानी एक