तहे तहेे दिल से लहे लहे दिल से सुक्रिया आदा कर$..!

अथ श्री नाच महातम कथा : चम्पारण में पलल-बढ़ल ऊ अदमी के लड़िकाई भी कवनो लड़िकाई भइल। जवन लवंडा नाच देखिके सग्यान ना भइल। तनिका इयाद करीं बरिस 1985-99 के गुजरल जमाना। गांव के शादी-बियाह के सीजन, जब बरिआत मरजाद रहत रहे। जवना बेरा मनोरंजन के खातिर ना डिश टीवी, ना एंड्राइड मोबाइल के सुविधा रहे। सिनेमा हवल खलिहा शहरे में रहे। ओह घड़ी केतना नाच मंडली जवार में हिट रहे।

पूर्वी चम्पारण के कोटवा के मैनेजर जादो, मंटू सिंह, बकुलहरा के चौधुर जी, गायघाट के वीरा जादो के नाच के सुपर स्टार लवंडा अनिल आ ऐनुल, जादोपुर के रामशंकर यादव के नाच, जिलदार जादो के नाच के गंगा लवंडा, इब्राहिमपुर के खीरा जादो के नाच के लवंडा रमेश का नाम अभियो केतना जने के इयाद होई। पश्चिमी चम्पारण (बेतिया) के रुलही के संत दुबे, मंगलापुर के महातम पांडे से लेके रामनगर, नरकटियागंज आ बगहा तक ले..! अब केतना नाच मालिक का नाम लिखल जाव। बाकिर जेतना भी नाच पार्टी रहे सबमें थरुहट आ नेपाल के बेसी कलाकार भरल रहे।

नगारची, तबालची, ढोलकहिया, हरमुनिया मास्टर, बैजू भा कैसियो मास्टर, कॉमेडियन, अनाउंसर सभके महातम रहे। केतना बखान कइल जाव। एहि से बुझ लीं, एगो नीमन जोकर अकेले प्रोग्राम हिट करा देवे। मज़ाक मज़ाक में गहिराह बात कह देवे। मने केहु के बेजाए ना लागे, उलटे देखनिहार हंस देवे। आ जवन बरिआत में लवंडा नाच ना जाए ओमे कबो-कबो ढेला चल जाए। खिसियाके सामियाना के डोरी काट द स लइका। कहल त इहो जाला कि बीरा जादो आ महातम पांडे के नाच के हजुरा, बाई जी के नाच के जाए।

जहिया गांव में कवनो बरिआत आवे, छावरिक सभे टोह में रहे, केकर नाच आइल बा। ओने बरतिया खाए जाए, एने नाच के टीम-टाम शुरू हो जाए। जब लाउडस्पीकर से हरमुनिया, बेंजु से बजावत लहरा सुनाए लागे। नाचदेखवा सरतिया लो के बेचइनी बढ़ जाए। केतना जल्दी बरतिया के खियाके, सभे नाच देखे जनवासा में पहुंच जाव। 52 चोप के सामियाना के भीतरी बिछावल दरी प लइकन भर जा स, चारु ओरी से गोल-गोल घेरके। आ बीचे में प्रोग्राम होखे। उमिर के लिहाज़ से बड़-बुज़ुर्ग लो चोप के अरिया बइठे लो नुकाके भा राउटी में सुतिके झांके लो।

कुछ रसिकदार लो जइसे दूल्हा के चाचा, मामा, फूफा, मउसा के कपार प जब सुबोधवा के निसा चढ़ जाए। उमिर के लोक-लिहाज ना कके अगाड़ी बइठके रुपया लुटावत रहे लो। बंदूक आ गद्दी के सवखिन कम ना रहलें। बोलीं त अइसन शमां बन्हा जाए सामियाना में, एक बेर आरती से शुरू भइल सफ़र चितरहार, सहला प्रोग्राम से लेके डरामा प जाके खतम होखे। का मजाल जे नाचदेखवा तनिको एने ओने हिल जास ओहिजा से। हाफ इंच छेदा वाला ढोडी देखावत, चउकी के तुड़ देवे वाला बुता से गोड़ कूदावत, डाड़ लचकावत लवंडा। कवनो के लुक एकदमे हीरोइन निहर रहे त कवनो छाका जइसन लाग$ स।

मने चोकटाइल गाल वाला बुढ़वन लवंडा के बनावटी केस। पाउडर के डिब्बा लगाके बनावल छाती आ ओहनी के गोड़ के फाटल मोजा देखिके खूबे हंसी आवत रहे। मनोरंजन के बाचल खुचल कमी ऊ लो के मुंहवा प आइल पसेना पूरा क देवे। जब गलिया प पोतल मुरदासंख दहा जाए त चेहरा देखे लायक रहे। ओह बेरा गनवो कइसन कइसन आवत रहे। ‘बथता आई हो दादा बथता…, गरमी से चुअता पसेनवा…, मारुती कार के अजब बहार इयार तनि हांक के देखना…, कॉलेजिया लईका ढूंढ़ लईहा हमरा ला बाबू जी… लवंडा बदनाम हुआ नसीबन तेरे लिए… केतना गिनावल जाव! ‘सइया हमार हो नथुनिया पे गोली मारे..’ गानवा प त केतना नचनिया सभे प गोली भी चल गइल रहे।

जब प्रोग्राम अपना चरम प रहे। ठीक ओहि बेरा भरल सामियाना में गुलाब जल वाला स्प्रे छिड़िकाए लागे। नाच के जोकर से ओकर ओतन नापल जाए। शुरुआत में आरती होखे। आ ड्रामा से पहिले सहला गावे लो, एमे सभे कलाकार ग्रुप में उतरे। रउआ इयाद बा कि भुला गइल बानी, जब ‘चमकता जगमगाता है अनोखा राम का सेहरा… गावत गावत कवनो लवंडा, एकबैक समधी के गोदी में जाके बइठ जाए, नेग ला।

ओहि में दूल्हा के बाबूजी के नाम बोलवावेला केहु पहुना, चुपचुपवा कागज प नाम लिखके आ एगो दस टकिया लगाके लवंडा भीरी पहुंचा देवे। आ लवंडा गावल छोड़िके बिचही में कमरी पीस के मुंह चोन्हिया के कहे लागे, ‘ तहे तहे दिल से… लहे लहे दिल से सुक्रिया आदा… कर$ तानी रे दादा..!” ओकरा बाद गजबे लइकन के थपड़ी पिटाए लागे। अब जे होखे, जिनगी में जवन कुछो बीत जला ऊ लवटी के ना आवे। नाच त अभियो केनहु केनहु देखे के मिली जाला। मने ऊ माजा अब कहां भेटाए वाला बा।

©️श्रीकांत सौरभ

Admin

भोजपुरिया माटी में जन्म लिया. जब से होश संभाला लोगों को जड़ों से कटते पाया. वर्षों से पढ़ते-लिखते हुए यहीं सीखा, इंसान दुनिया में कहीं भी चला जाए. कितनी भी तरक्की कर ले. मां, मातृभाषा और मातृभूमि को त्याग कर खुशहाल नहीं रह सकता. इसीलिए अपनी भाषा में, अपने लोगों के लिए, अपनी बात लिखता हूं !

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