मदर्स डे प एगो माई के नामे बुरबक बेटा के चिट्ठी

मां,

गोड़ छूके गोड़ लाग$ तानी!!!

पाता बा आजु ‘मदर्स डे’ ह! सभे केहु इयाद करता अपना माई के। मने हम भुलाइल कब रहनी ह तोहरा के, जे इयाद करती। हमनी के भले बिलाला निहर छोड़िके चली गइलू। बाकिर का बताई कि कब बिसरेलु। सभे ओरी त लउकबे करेलू। आम-मारचा के आचार, सरसो-बथुआ के साग में! मकर सक्रंति के लाई-तिलुआ में! छठी घाट के गवनई-अरघ में! जिउतिया के नहान-कथा में! होली के रंग-अबीर में! दीवाली के दियरी-बाती में! चुमावन, मटकोरा, परिछावन, बियाह के भोजपुरी गीतन, सोहर, लाचारी में! लइकन के कोरा खेलावत कवनो माई के अंचरा में!

ई कुल्ही मोका प कबो-कबो रोआई भी आ जाला। मने आंखि के लोर पोछके छुपा लेवेनी। तुही नु कहत रहलू, मरद के दिल रोयेला, आंखि ना। एहि से सोचनी ह एगो चिठिए लिखी दिहीं। पूरे तीन बरिस हो जाई तोहरा गइला। 16 मई के ए दुनिया से विदा भइल रहलू, 27 बरिस ले बेमारी से लड़त-लड़त। दवाई आ बीमारी में खूबे लड़ाई भइल। एगो मुए ना देत रहे, एगो कहे संगही लेके जाएम। एह दुनु के बलजोरी में तोहार देही जरजर हो गइल रहे। बस एतने कहब मरी-मरिके जियत रहलु।

पहिले हार्ट, फेरु सुगर के बेमारी। ओकरा बाद किडनी फेल हो गइल। तबहु संतान के मोह अनघा कष्ट प भारी रहे। तोहरा अबही जाए के मन रहे कहवां। मरे के दु बरिस पहिले से पूरा देही सूज गइल रहे! यूरिन निकलल बन हो गइल! सांस ना लिहल जाए! आ फेरु कोमा में अनंतकाल ला चली गइलू! अंचरा के छाही मिटल आ ममता के मंदिर टूटी गइल! भगवान दुश्मनो के वइसन मवत ना देस! पापा जी के मरला के बाद, घर के एगो बरियार आधार स्तम्भ ढही गइल।

छोटकी बेटी के बियाह, नाती आ छोटका पोता के मुंह ना देख पवलु। हमरा से तोहरा ढेर सिकुआ-सिकायत रहे। तोहरा जिनगी के अंतिम आठ बरिस ले संगे बितवनी। अपना से जइसे बुझाइल, सेवा में तोहरा कोर कसर ना छोड़नी। बाकी जवन चतुर-चालाक बेटा दूर रहेला ओकरा में ना। जवन बुरबकवा बेटा लगे रहेला। नीमन-बेजाए जइसे होखे, सहजोग करेला। गारजियन के ओकरे में ढेर कमी लउकेला, इहो सांच बा।

आउर सब ठीक बा! मने जब तुही नइखू त खाक ठीक बा! तोहरा दया से बेटा-पतोह, पोती-पोता सभे स्वस्थ बा। गुनगुन पांच बरिस के हो गइली। असो नर्सरी में चली जइहे। पोता कुंज भी चार बरिस के भइले। एलकेजी में नाम लिखाई। गुनगुन के तोहर चेहरा इयाद बा। कहेली कि दादी मु गइली। आ कुंज से पूछल जाला त कहेले कि दादी भगवान किहां गइल बाड़ी। आछा त एतने रहे दे तानी। लॉक डाउन में सभे कोई फंसल बा। कोरोना से बाचेम त अगिला बरिस फेरु एगो चिट्ठी भेजेम।

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तोहार बुरबक बेटा,

सिरिकांत

Admin

भोजपुरिया माटी में जन्म लिया. जब से होश संभाला लोगों को जड़ों से कटते पाया. वर्षों से पढ़ते-लिखते हुए यहीं सीखा, इंसान दुनिया में कहीं भी चला जाए. कितनी भी तरक्की कर ले. मां, मातृभाषा और मातृभूमि को त्याग कर खुशहाल नहीं रह सकता. इसीलिए अपनी भाषा में, अपने लोगों के लिए, अपनी बात लिखता हूं !

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